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कोटा के प्रसिद्ध चंडी माता मंदिर..बड़ी मढिया शीतला माता मंदिर में प्रतिवर्ष की तरह भक्तो ने जलवाये मनोकामना जोतिकलश

कोटा के प्राचीन मंदिरों में प्रतिवर्ष मनोकामना पूर्ति हेतु जलाए जाते हैं मनोकामना ज्योति कलश

कोटा के चंडी माता चौक में स्थित है चंडी माता का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर। इस मंदिर के अंदर अति प्राचीन कुंड स्थित है। मंदिर में नवरात्रि में कीर्तन जस गीत होते रहते हैं इस दौरान मां चंडी मां दुर्गा मां कालिका भक्तों पर सवार होती हैं और दरबार में भक्तों को आशीर्वाद देती है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतर चली आ रही है।

यहां के वर्तमान पुजारी सुदामा प्रसाद तिवारी एवं मनोज तिवारी द्वारा माता की विधिवत पूजा की जाती है और  इनकी देखरेख में ज्योति कलश जलाए जाते हैं और जावरा भी बोया जाता है। नवरात्रि में हर रोज सुबह से ही मंदिर में  जल चढ़ाने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है।

यही कोटा की बड़ी बढ़िया में शीतला माता विराजमान है जहां पुराने पंडित के द्वारा माता की पूजा अर्चना सेवा की जाती है यहां भी नवरात्रि में प्रतिवर्ष मनोकामना ज्योति कलश एवं जवारा बोया जाता है ।

कोटा के दोनों ही प्राचीन मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है सप्तमी और अष्टमी के दिन मंदिर में पैर रखने की जगह तक नहीं होती है यहां वक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं पूरी श्रद्धा भक्ति से माता की पूजा सेवा करते हैं

नवमी के दिन जवारा कलश का विसर्जन कर दिया जाता है और दसवीं को और दशमी को दशहरा मनाया जाता है। कोटा का दशहरा बहुत प्रसिद्ध और मशहूर माना जाता है आसपास के गांव के लोग दशहरे को देखने आते हैं बहुत मनमोहक झांकियां निकलते हैं और बहुत हर्षोल्लाह से त्योहार को कोटा छेत्र में मनाया जाता है।

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